Thursday, September 1, 2016

First story part2

"उसकी सुंदर लिखाई की बहुत तारीफ हुई थी आज कलास में, बस वोही देखना था कि कैसे लिखता है वो" परी ने थोड़ा मायूस होते हुए कहा। मैंने बड़ी मुशकिल से अपनी हंसी को रोकते हुए मन में सोचा, यार कोई तो अच्छा सा बहाना बना लेती।चलो अब तो ये काम करना ही पडे़गा। मैंने तीन कदम उठाए और झट से जा के बोला " तुम्हारी कापी चाहिए थी"। "क्यों"।उसने कुछ रूखाई और कुछ आश्चर्य से जवाब दिया। " तुम्हारी लिखाई देखनी है, सुना है कलास में सर बड़ी तारीफ कर रहे थे"। मैंने कुछ ज्यादा ही straightforward होते हुए कहा। "अच्छा ये लो देख लो" उसने अपनी कापी मेरी तरफ बढ़ा दी। मैंने झट से कापी पकड़ी और फट से जा के परी को देते हुए बोला " लो देखो लिखाई"। परी ने कुछ झिझकते हुए कापी पकड़ी। पीछे मुड़ कर तो नहीं देखा मैंने पर परी के भाव देख के पता चल गया कि उन लड़को के ग्रूप का धयान हमारी तरफ ही था। हम तीनों फटाफट वहां से चल दिए। मगर केवल कापी लेना ही मेरा काम भर नहीं था अभी तो मुझे उसे वापस भी देनी थी। एक अजीब सी मुशकिल में डाल लिया था मैंने खुद को अपनी प्यारी सहेलियों की मदद करने के चक्कर में। अब तो ये रोज का सिलसिला बन चुका था। दू "उसकी सुंदर लिखाई की बहुत तारीफ हुई थी आज कलास में, बस वोही देखना था कि कैसे लिखता है वो" परी ने थोड़ा मायूस होते हुए कहा। मैंने बड़ी मुशकिल से अपनी हंसी को रोकते हुए मन में सोचा, यार कोई तो अच्छा सा बहाना बना लेती।चलो अब तो ये काम करना ही पडे़गा। मैंने तीन कदम उठाए और झट से जा के बोला " तुम्हारी कापी चाहिए थी"। "क्यों"।उसने कुछ रूखाई और कुछ आश्चर्य से जवाब दिया। " तुम्हारी लिखाई देखनी है, सुना है कलास में सर बड़ी तारीफ कर रहे थे"। मैंने कुछ ज्यादा ही straightforward होते हुए कहा। "अच्छा ये लो देख लो" उसने अपनी कापी मेरी तरफ बढ़ा दी। मैंने झट से कापी पकड़ी और फट से जा के परी को देते हुए बोला " लो देखो लिखाई"। परी ने कुछ झिझकते हुए कापी पकड़ी। पीछे मुड़ कर तो नहीं देखा मैंने पर परी के भाव देख के पता चल गया कि उन लड़को के ग्रूप का धयान हमारी तरफ ही था। हम तीनों फटाफट वहां से चल दिए। मगर केवल कापी लेना ही मेरा काम भर नहीं था अभी तो मुझे उसे वापस भी देनी थी। एक अजीब सी मुशकिल में डाल लिया था मैंने खुद को अपनी प्यारी सहेलियों की मदद करने के चक्कर में। अब तो ये रोज का सिलसिला बन चुका था। दूसरे दिन मैंने एक कदम और बढ़ाते हुए उसका नाम भी पुछ ही लिया। तो मेरे तीसरे कापी दोस्त का नाम था चेतन। लिखाई के बारे में पता चला कि जनाब ने अपने पापा से खूब पिटाई खाई थी इसके चक्कर में, तो असल में तारीफ के हकदार पापा थे, जिन्होंने गधे को घोड़ा बनाया था। उसकी राम कहानी मतलब अच्छी लिखाई का इतिहास जानने के साथ ही एक और मुसीबत मेरे गले पड़ गई वो यह कि अब महाराज नें मेरी लिखाई को सुंदर बनाने का जिम्मा उठा लिया। साफ शब्दों में लिखूं तो मेरे रूप में उसे एक अच्छा मुर्गा मिला अपने पापा की ज्यादतियों का बदला लेने के लिए।

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