कुछ बातों में इनकार था, कुछ में इकरार ही सही..….
राहों पर चलने से मतलब था, क्योंकि मंजिलें लापता सी थी.......
लेकिन इन सिलसिलों की आहटों में, कुछ बातें अनकही सी थी. ।।।।
कुछ इनकार में इकरार ही सही हैं, कुछ लापता से मंजिलें भी सही.......
कुछ सिलसिलों में जिंदगी मिली, कुछ आहटों से रोशनी हुई!!!!!!!!!
कुछ दूर उनसे हम थे, कुछ दूर वो भी.......
कुछ फासले यहां थे, कुछ फासले वहां भी......
कुछ कदम हम ने लिए, कुछ थे उनके भी......
कुछ वादे चुप से थे, कुछ बोलते भी......
समझते रहे जिसे "एकतरफा मुहब्बत"
उसमें कुछ इकरार हमारे थे, कुछ थे उनके भी!!!!!