वो अजनबी है पर लगता क्यों नहीं......!!!!!
जो ख्वाबों ख्यालों में हर वक़्त है,
हकीकत बन के रहता क्यों नहीं......!!!!!
हर ख़ुशी जुड़ी है उससे,
वो गम बांटने आता क्यों नहीं.....!!!!!
ख्वाहिश है वो मेरी फिर,
मुकम्मल होती क्यों नहीं.....!!!!!
हार चुकी हूं अपना सब जिस पर,
वो मुझ पर हक जमाता क्यों नहीं.....!!!!!
मंजिल है वो मेरी अब,
फिर भी वो मुझ में ठहरता क्यों नहीं.....!!!!!
वो जो अजनबी है तो,
अजनबी लगता क्यों नहीं.....!!!!!
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