Wednesday, June 20, 2018

कुछ सवाल-जवाब रहने दो

सुनो...... प्यार हो, प्यार ही रहोगे । तुम से बस इतनी गुजारिश---- प्यार की थोड़ी सी कदर करनी तो सीखो। पता है दो शब्दों में कह दोगे - " करता तो हूं!" कह दोगे "सब कुछ दिया तुम्हें!" कह दोगे "मुझे तुम चाहिए, हमेशा!" कह दोगे " नहीं छोड़ूंगा तुम्हें!" तुम्हारा एक एक लफ्ज़ याद रखती हूं , इबादत की तरह । मगर तुम हमेशा भूल जाते हो मुझे, भूल जाते हो कि मेरे में भी संवदेनाएं हैं। हर बात में मेरी गलती निकाल देते हो, दुनिया भर के इल्ज़ाम मेरे उपर लगा देते हो। सोचा कभी मुझे कितना बुरा लगता होगा? कितना दर्द होता होगा??? उस दिन भी तुमने कितनी आसानी से कह दिया कि मैंने तुम्हारी फैमिली खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वो छोटी सी बच्ची, जो मूझे खुद से भी ज्यादा प्यारी है और तुम ये जानते हो, फिर भी तुम ने कहा कि मैंने उसके बारे में भी नहीं सोचा। हमेशा की तरह मैने तुम्हारा हर इल्ज़ाम, हर शिकवा, हर शिकायत कबूल कर ली। माफी भी मांगी। मगर इस बार खुद को समझा नहीं पाई। नहीं मना पाई खुद को कि सारी गलती मेरी ही थी। नहीं....... इस बार मैं गलत नहीं थी। तुम्हें मानना होगा कि उस छोटी सी बच्ची का बुरा कभी नहीं चाहा मैंने, बल्कि उस बच्ची का हक तुम किसी और के बच्चों को दे रहे हो और कोई समझ कर, जान कर भी , अनजान बन कर उस बच्ची का हक ले रहा है। तुम्हें समझना होगा कि मैंने तुम से तुम्हारी फैमिली छीनने की कोशिश नहीं करी बल्कि तुम खुद दूसरी फैमिली बना कर चल रहे हो। सारे हक दूसरों को दे रहे हो। तुम्हें ये भी जान लेना होगा कि इस बार तुम ने हमारे प्यार का हक भी किसी और को देना चाहा। तुम्हें पता होता है हमेशा कि मैं कब तुम से बात कर सकती हूं कब नहीं, फिर भी तुम ने किसी और के लिए लड़ाई करने के लिए मेरे साथ जबरदस्ती बात की। सुनो........ जो भी है, इससे पहले कि मैं अपने प्यार को गालियां दूं, अपने प्यार का अपमान करूं, बस रहम करो! बस प्यार हो, प्यार ही रहो। ना तुम से प्यार मांगा, ना कोई हक चाहा। बस और इल्ज़ाम नहीं। बहुत नाराज़ हूं, पर मुझे मनाना मत! बहुत गुस्से हूं, पर मुझे शांत मत करना! बस............ "कुछ सवाल तुम रहने दो...... कुछ जवाब मैं रहने दूं!"

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